सांस फूलने का इलाज, दवा, कारण और देसी घरेलू नुस्खे

सांस फूलने की बीमारी का इलाज और मुख्य कारण

दम फूलना या सांस फूलने का इलाज कैसे करें : सांस फूलने या सांस चढ़ने की समस्या तब होती है, जब फेफड़ो तक पर्याप्त मात्रा में वायु नहीं पहुंच पाती अर्थात फेफड़ो तक वायु पहुंचने में परेशानी होती है| सांस फूलने की समस्या अक्सर उन लोगो में अधिक देखने को मिलती है, जिन्हे दिल या फेफड़ों से जुडी कोई भी समस्या होती है| इसे ऐसे भी कह सकते है, कि दिल और फेफड़ों में होने वाली समस्या आपकी सांसो में बाधा डालती है|

Saas Ki Bimari Ka Ilaj

सांस फूलना (Sans Fulna in Hindi)

सांस फूलना शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है, लेकिन तब जब यह किसी मेहनत वाले काम को करने के बाद हो| अगर बिना कोई मेहनत का काम किये बिना आपकी सांस फूलने लगती है, तो यह बीमारी की श्रेणी में आ जाती है|

सांस फूलने की समस्या कुछ लोगो को अचानक परन्तु कुछ समय के लिए होती है, इसके विपरीत सांस फूलने की समस्या कुछ लोगो को अचानक होने के बाद लम्बे समय तक उनका पीछा नहीं छोड़ती| सांस फूलने पर छाती में जकड़न और सांस लेने में कमी जैसी प्रॉब्लम होना शुरू हो जाती है| सांस फूलने के बाद होने वाली प्रतिक्रिया सब लोगो में अलग अलग होती है|

सांस फूलने के कारण फेफड़ो को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन इससे होने वाला अनुभव काफी डरावना बेचैनी भरा होता है| सांस फूलने के कई कारण होते है, इन कारणों को जानकर हमें इनसे बचने और इसका सही इलाज खोजने में मदद मिलेगी| आइये जाने सांस के कारण और इसका इलाज|

सांस फूलने का इलाज (Saas Ki Bimari Ka Ilaj)

तिल का तेल (Sesame oil) – अगर ठण्ड लगने के कारण आपकी छाती जाम हो गयी है, या दमे के कारण आपकी सांस तेजी से फूलने लगी है, तो तिल का तेल हल्का गर्म करके इस तेल से कमर और छाती को सेंक दे| गुनगुने तेल की सेंक से छाती खुल जायेगी, और सांस सामान्य हो जायेगी|

अंजीर (Fig) – जिन लोगो की सांस फूलती है, उन्हें अंजीर का सेवन करना चाहिए| अंजीर में सांस फूलने के इलाज की एक गुणकारी दवा मानी जाती है| अंजीर खाने से छाती में जमी गन्दगी और बलगम को साफ करके शरीर से बाहर निकाल देता है| जिसके कारण सांस नली की पूरी तरह सफाई हो जाती है| सफाई के बाद सांस नली सुचारु रूप से काम करती है|

रात को सोने से पहले तीन से चार अंजीर धो कर गुनगुने पानी में भिगोकर रख दे| अब अगले दिन सुबह खाली पेट अंजीर को चबाकर खाये और उसके बाद ऊपर से अंजीर का पानी पी ले| सांस फूलने के इलाज के लिए इस घरेलू नुस्खे को कम से कम एक महीने तक अपनाये, इससे आपको असर जरूर नजर आयेगा|

लहसुन (Garlic) – लहसुन का इस्तेमाल अनेक प्रकार की बीमारियों के इलाज में किया जाता है| लहसुन को एक विशेष प्रकार की औषधि भी माना जाता है| लहसुन का इस्तेमाल सांस फूलने की समस्या को दूर करने में भी सहायक है| सांस फूलने पर रात को सोने से पहले एक गिलास में दो से तीन कलियाँ लहसुन की उबालकर उस दूध को गुनगुना होने पर पी जाये| ध्यान रहे ये दूध पीने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है| कुछ दिनों तक लगातार इस घरेलू नुस्खे को अपनाने से साँस फूलने की समस्या दूर हो जायेगी|

अजवायन (Thymes) – अजवायन के पानी से भाप लेने से सांस फूलने की समस्या जड़ से ख़त्म हो जाती है, क्योंकि इस पानी से भाप लेने से श्वास नली पूरी तरह साफ़ हो जाती है और सांस फूलने की समस्या अधिकतर श्वास नली में मैल जमने या श्वास नली में सूजन आने के कारण होती है| अजवायन के पानी से भाप लेने से श्वास नली की सूजन को आराम मिलता है और श्वास नली में अटका मैल भी साफ हो जाता है|

एक लीटर पानी में 10 ग्राम अजवायन पीसकर डाल दे| अब इस पानी को उबलने के लिए रख दे| जब इस पानी से भाप निकलने लगे, तब इस पानी की भाप ले| इस पानी की भाप रोजाना कुछ दिनों तक लेने से आपको असर नजर आयेगा|

लौंग (Cloves) – एक कप पानी में चार लौंग और दो चम्मच शहद डालकर पानी को आधा कप होने तक उबाले| अब इस काढ़े का थोड़ी थोड़ी मात्रा में दिन में तीन बार सेवन करे| इस काढ़े के सेवन से श्वसन तंत्र मजबूत होता है और श्वास नली में आने वाली रुकावट दूर हो जाती है, जिससे सांस सामान्य स्तर पर आ जाती है|

अंगूर (Grapes) – सांस फूलने की समस्या हो या दमे की अंगूर का सेवन दोनों समस्याओं के इलाज में सहायक है| सांस फूलने पर अंगूर का जूस पियें या ताजे अंगूर खाये| कुछ डॉक्टर के अनुसार सांस फूलने, दमा या अन्य श्वसन से जुडी बीमारी अंगूर के बाग में जाने से ही ठीक हो जाती है|

नीबू (lemon) – सांस फूलने पर गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर रोजाना पीने से सांस फूलने की समस्या पूरी तरह खत्म हो जायेगी| ध्यान रहे केवल गुनगुने या गर्म पानी का ही इस्तेमाल करे, गलती से भी ठन्डे पानी का इस्तेमाल ना करे|

चौलाई (Amaranth) – चौलाई के पत्तो के रस में शहद मिलाकर पीने से सांस फूलने और श्वसन से जुडी सभी बीमारियां ठीक हो जाती है| चौलाई के पत्तो के रस को सांस फूलने की दवा भी माना जाता है| इस घरेलू नुस्खे के रोजाना इस्तेमाल से आपको अनुकूल परिणाम जरूर मिलेगा| चौलाई के पत्तो की सब्जी और साग बनाकर भी खाया जा सकता है|

हींग (Asafoetida) – सांस फूलने की समस्या होने पर यह हींग के सेवन से दूर हो जाती है और अगर आप पहले से दैनिक रूप से थोड़ी थोड़ी मात्रा में हींग का सेवन करते है, तो आपको सांस फूलने या श्वसन सम्बन्धी कोई भी समस्या कभी नहीं होती| सांस फूलने फूलने पर शहद के साथ चीनी के दाने के बराबर हींग ले| इसे दिन में तीन बार लेने से सांस फूलने की समस्या जड़ से ख़त्म हो जायेगी|

तुलसी (Basil) – तुलसी का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और श्वसन तंत्र पर एलर्जी और बाहरी प्रदूषण के हमले का किसी भी प्रकार का कोई असर नहीं होता| अगर आपको सांस फूलने या दवा जैसी श्वसन से जुडी कोई भी परेशानी है, तो तुलसी से बने इस काढ़े का सेवन जरूर करे|

तुलसी का काढ़ा बनाने के लिए एक कप पानी में 7 से 8 तुलसी की पत्तिया, काली मिर्च, काला नमक और एक चुटकी और थोड़ी मात्रा में सौंठ पाउडर डालकर पानी को तब तक उबाले जब तक पानी आधा कप ना रह जाये| अब इस काढ़े को गुनगुना गुनगुना रोजाना सुबह शाम पियें| अगर आप रोजाना तुलसी के इस काढ़े को पियेंगे तो साँस फूलने का इलाज पूरी तरह हो जायेगा|

सौंफ (Fennel) – अगर आप सौंफ का नियमित रूप से इस्तेमाल करे तो वर्त्तमान में आपको सांस फूलने और श्वसन से जुडी कोई समस्या कभी नहीं होगी| अगर आपकी सांस फूलती है, तब भी सौंफ के सेवन से लाभ होता है| सौंफ का सेवन करने से छाती में जमा बलगम पूरी तरह निकल जाता है| अगर आपको रोजाना सौंफ का काढ़ा बनाकर पियेंगे तो आपको सांस फूलने की समस्या से पूरी तरह छुटकारा मिल जायेगा|

सांस फूलने के लक्षण (Sans Fulne Ke Lakshan)

  • सांस लेने में परेशानी होना
  • लम्बी और गहरी सांस ना ले पाना
  • हवा की कमी का अनुभव होना
  • छाती में जकड़न होना

सांस फूलने के कारण (Sans Fulne Ke karan in Hindi)

  • सिगरेट पीना
  • सूजन
  • दूषित वातावरण
  • एलर्जी
  • संक्रमण
  • खून में ऑक्सीज़न की कमी
  • मानसिक तनाव और चिंता
  • अधिक जोरदार व्यायाम करना
  • शारीरिक वजन में असंतुलन होना

सांस फूलने पर डॉक्टर को कब दिखाएँ –

  • सांस फूलने के साथ साथ घरघर्राहट की आवाज का आना
  • सीधे लेटते समय सांस लेने में परेशानी
  • सांस फूलने के साथ साथ खांसी होना
  • सांस फूलने के साथ टखनों और पैरो में सूजन
  • सांस फूलने के साथ तेज बुखार आना
  • सांस फूलने के साथ ठण्ड लगना
  • सांस लेने में होने वाली कठिनाई बढ़ जाना

सांस फूलने के जोखिम कारक (Shortness of Breath Risk Factors in Hindi)

सांस फूलने की समस्या अगर आपको लम्बे समय से है और यह ठीक नहीं हो रही, तो यह किसी गंभीर रोग का कारण भी हो सकती है| नियमित रूप से सांस फूलने से आपके फेफड़ो और दिल पर इसका विपरीत असर होता है| कॉर्बनडाइऑक्साइड को शरीर से बाहर निकालने और ऑक्सीजन को पूरे शरीर तक पहुंचाने की किर्या को जो चीज बांधित करती है, वो सांस फूलने के लिए भी ज़िम्मेदार है| निचे दी गयी हेल्थ प्रॉब्लम सांस फूलने की समस्या को पैदा करने में काफी हद तक ज़िम्मेदार है|

  • शरीर में खून की कमी
  • एलर्जी के प्रति गंभीर प्रतिक्रिया
  • फेफड़ो का कैंसर
  • सांस लेने की नली में बाधा
  • दिल के कार्यकलापों में असामान्यता
  • क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी रोग
  • कार्बन मोनोऑक्साइड पॉइजनिंग
  • दिल में सूजन आना
  • फेफड़ो से जुडी बीमारियां
  • दिल का दौरा पड़ना
  • अस्थमा
  • फेफड़ो में खून के थक्के जमना
  • निमोनिया की समस्या

सांस फूलने से बचाव (Prevention of Shortness of Breath in Hindi)

1. अस्थमा को बढ़ाने वाली चीजों से दुरी बनाकर रखे|

2. सांस फूलने पर पंखा चलाकर उसके सामने बैठ जाये और अपने चेहरे पर हवा लगने दे|

3. सांस फूलने पर शरीर की जांच करा ले, क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का शुरूआती लक्षण हो सकता है|

4. वायु प्रदूषण सांस फूलने का कारण है, इसीलिए वायु प्रदूषण से हमेशा बचकर रहे|

5. 5,000 फीट की ऊंचाई पर अगर सांस फूलने से बचना चाहते है, तो अधिक परिश्रम ना करे और तनाव से पूरी तरह दूर रहे|

6. सांस फूलने से अगर बचना चाहते है, तो सांस को रोकने कोशिश कभी ना करे|

7. धूम्रपान करने से भी सांस फूलने लगती है, इसीलिए धूम्रपान पूरी तरह करना बंद कर दे|

8. अगर आपका वजन बहुत अधिक है, तो अपना वजन कम करे, क्योंकि मोटापा सांस फूलने का कारण है|

सांस फूलने का निदान (Diagnosis of Shortness of Breath in Hindi)

पल्स ऑक्सीमीटर – पल्स ऑक्सीमीटर एक प्रकार का उपकरण है| इस उपकरण को कान की पट्टिका या अंगुली पर लगाकर ब्लड में ऑक्सीज़न की मात्रा का पता लगाया जाता है|

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम – इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम दिल के इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स को मापने वाला एक यंत्र है| ये यंत्र दिल के दौरे और दिल की धड़कनो के सिगनल से जुडी जानकारी देता है|

एक्स-रे या सीटी स्कैन – फेफड़ों में खून के थक्के और निमोनिया आदि बीमारी की जाँच करने के लिए छाती का सीटी स्कैन या एक्स-रे किया जाता है|

ब्लड टेस्ट – डॉक्टर संक्रमण या एनीमिया का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट में पूर्ण रक्त की गणना करते है|

इस पोस्ट में हमने आपको सांस फूलने का इलाज घर पर घरेलू नुस्खों के माध्यम से कैसे करे, इसके बारे में बताया| आपको हमारी ये पोस्ट कैसी लगी, हमें कमेंट करके बताये| अगर आप किसी अन्य विषय पर हमसे जानकारी चाहते है, या इस पोस्ट के बारे में अन्य कोई जानकारी चाहते है, तो कमेंट के माध्यम से हमें बताना ना भूले|

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