Newborn Baby Jaundice Treatment in Hindi नवजातों बच्चो में पीलिया का इलाज

Newborn Baby Jaundice Treatment at Home in Hindi

Newborn Baby Jaundice Treatment in Hindi : जॉन्डिस (Jaundice) के बारे में तो आपने सुना ही होगा| जी हां, जॉन्डिस का अर्थ पीलिया से है, और यह बच्चो में होने वाली आम बीमारी है| एक शोध के अनुसार पीलिया की बीमारी 70 % शिशुओं को ही होती है|

Newborn Baby Jaundice Treatment in Hindi

शरीर में यलो बाइल पिगमेंट अर्थात बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने पर जॉन्डिस की बीमारी हो जाती है| बिलीरुबिन जब ब्लड के साथ शरीर की त्वचा में जम जाता है, तब बच्चे की त्वचा का रंग पीला पड़ने लगता है| नवजात बच्चे का जिगर अपरिपक्व होता है, जिसके कारण ब्लड से बिलीरुबिन को पूरी तरह अलग नहीं कर पाते, जिसके कारण जॉन्डिस होने का खतरा बढ़ जाता है|

अगर बिलीरुबिन मल के साथ नहीं निकाला जाता, तो बिलीरुबिन को आंते सोख लेती है| बिलीरुबिन का आंतो द्वारा सोखा जाना, जॉन्डिस होने का सबसे बड़ा कारण माना जाता है| एक अन्य रिसर्च के अनुसार जो बच्चे समय से पहले पैदा होते है, उन बच्चो में जॉन्डिस होने का खतरा अन्य बच्चो की तुलना में अधिक होता है| समय से पहले का अर्थ है, कि बच्चा 9 महीने से पहले ही पैदा हो जाता है|

बच्चे के जन्म के बाद शुरुआत में बच्चे में जॉन्डिस के लक्षण नजर नहीं आते| जॉन्डिस के लक्षण एक हफ्ते बाद नजर आने लगते है| ऐसे में जॉन्डिस के लक्षणों को पहचान कर बच्चे का समय पर इलाज कराना बहुत जरुरी है| चलिए जाने बच्चो में जॉन्डिस के लक्षण और जॉन्डिस के इलाज के बारे में|

बच्चो में पीलिया के लक्षण (Symptoms of Jaundice in Newborn Baby in Hindi)

1. शरीर का पीला पड़ना
2. चिड़चिड़ापन
3. मसूढ़ों का पीला होना
4. हाथ की हथेलिया और नाख़ून पिले पड़ना
5. बच्चे का लगातार रोते रहना

बच्चो में पीलिया का इलाज (Newborn Baby Jaundice Treatment in Hindi)

फोटोथैरेपी के माध्यम से जॉन्डिस ग्रसित बच्चो का इलाज किया जाता है| फोटोथैरेपी में बच्चे को दो से तीन दिन के लिए गर्म प्रकाश की किरणों में रखा जाता है| ये किरणे जॉन्डिस को कम करती है| ये किरणे शिशु के शरीर में जमा बिलिरुबिन को लूमिरुबिन में बदल देती है| लूमिरुबिन आसानी से पेशाब या पित्‍त के रास्ते से शरीर से बाहर निकल जाता है|

फोटोथैरेपी से निकलने वाली किरणों की रौशनी बहुत तेज होती है| इससे बच्चे की आँखों को नुकसान हो सकता है, इसीलिए फोटोथैरेपी के दौरान बच्चे की आँखों पर चश्मा लगाया जाता है| फोटोथैरेपी के दौरान बच्चे को अधिक मात्रा में दूध पिलाना चाहिए| अगर फोटोथैरेपी विधि के माध्यम से भी बच्चे का बिलिरुबिन निचे नहीं गया, तो डॉक्टर फाइबर ऑपटिक ब्‍लैंकेट द्वारा बच्चे का इलाज करते है|

बच्चो में पीलिया का उपचार (Newborn Baby Jaundice Treatment at Home in Hindi)

शिशुओं में जॉन्डिस का इलाज करने के लिए फोटोथैरेपी को अपनाया जाता है, लेकिन फोटोथैरेपी के साथ ही जॉन्डिस का घरेलू इलाज भी किया जा सकता है| इन घरेलू उपाय के माध्यम से बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के जॉन्डिस का इलाज किया जा सकता है| चलिए जाने जॉन्डिस के इलाज के घरेलू उपाय|

1. सूरज की रोशनी (Sunlight) : सूरज की किरणे जॉन्डिस को पूरी तरह खत्म करने के लिए उपयोगी है| सूरज की किरणे बिलीरुबिन के स्तर को कम करने में सहायक है| इससे बिलीरुबिन का स्तर धीरे धीरे कम होने लगता है| जॉन्डिस होने पर बच्चे को एक से दो घंटे के लिए धुप में लिटाये| जॉन्डिस के इलाज के लिए बच्चे को सुबह की हल्की धुप में लिटाये| इस बात का ध्यान रखे की बच्चे की त्वचा पर सूरज की सीधी किरणे ना पड़े| ऐसा होने से बच्चे की स्किन को नुकसान हो सकता है|

2. ब्रेस्‍टफीडिंग (Breastfeeding) – शरीर से बिलीरुबिन ना निकल पाने के कारण शिशु का लिवर बहुत कमजोर हो जाता है| ब्रेस्‍टफीडिंग एक ऐसी किर्या है, जिसके माध्यम से बच्चे के शरीर से बिलीरुबिन को पेशाब या मल के रास्ते से बाहर निकाला जाता है| बिलीरुबिन को शरीर से बाहर निकालने के लिए बच्चे की अच्छे से ब्रेस्‍टफीडिंग करानी चाहिए| जॉन्डिस के कारण बच्चे को नींद बहुत आती है, ऐसे में माँ को बच्चे को समय समय पर जगाकर दूध पिलाना चाहिए|

3. फारमूला (Pharamula) – अगर आपके बच्चे को स्तन से दूध पीने में किसी भी प्रकार की तकलीफ होती है, तो बच्चे के दूध का इंतजाम लैक्‍टेशन स्‍पेशलिस्‍ट की राय लेकर करे| इसके अलावा आप अपने स्तनों से दूध निकालकर चम्मच से बच्चे को दूध पीला सकती है|

इस पोस्ट में आपने नजवात बच्चो में जॉन्डिस का इलाज कैसे करे इसके बारे में जाना| जिनके घरो में अभी नन्ना मुन्ना बच्चा आया है, या फिर आने वाला है, उनके लिए यह आर्टिकल बहुत उपयोगी है| जॉन्डिस का इलाज समय पर कराना बहुत जरुरी है, ऐसे में ये आर्टिकल आपके लिए लाभकारी होगा| ये पोस्ट आपको कैसी लगी, हमें जरूर बताये| पोस्ट के बारे में अगर आपका कोई सवाल है, तो आप अपना सवाल कमेंट के माध्यम से हमसे पूछ सकते है|

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