काला मोतियाबिंद का उपचार | Treatment of Cataract in Hindi

मोतियाबिंद के लक्षण, उपचार [Cataract in Hindi]

मोतियाबिंद (Cataract) आँखों से जुडी एक खतरनाक बीमारी है, जिसके कारण आँखों की रौशनी धुंधली हो जाती है या पूरी तरह ख़त्म हो जाती है| मोतियाबिंद (Cataract) के रोग के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है, जागरूकता में कमी| इस पोस्ट में हम आपको मोतियाबिंद (Cataract) के बारे में विस्तार से जानकारी देने जा रहे है| इस मोतियाबिंद (Cataract) के बाद आपको इस रोग से खुद का बचाव करने में मदद मिलेगी|

Motiabind

 

मोतियाबिंद क्या है (What is a Cataract)

मोतियाबिंद को अंग्रेजी में Cataract कहते है| यह आँखों से जुड़ा एक सामान्य प्रकार का रोग है, जो अधिकतर अधिक उम्र के लोगो में देखने को मिलता है| जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है, वैसे वैसे आँखों के Lens की पारदर्शिता कम होती जाती है| Lens की पारदर्शिता कम होने के कारण आँखों में जाने से पहले ही प्रकाश अवरुद्ध हो जाता है| मोतियाबिंद एक आँख या फिर दोनों आँखों को प्रभावित कर सकता है| ‘

मोतियाबिंद का रोग आंखों में प्रोटीन के लच्छे जमा होने के कारण होता है| प्रोटीन के ये लच्छे लेंस को रेटिना को किसी भी चीज का स्पष्ट चित्र भेजने नहीं देते| यह रोग उम्र बढ़ने के साथ साथ धीरे धीरे विकसित होता है| रात को कम नजर आना, धुंधला दिखना, रंगो का हल्का नजर आना आदि मोतियाबिंद के प्रमुख और शुरूआती लक्षण है|

मोतियाबिंद के प्रकार (Types of Cataract in Hindi)

  • न्यूक्लिअर स्क्लेरोटिक मोतियाबिंद (Nuclear Sclerotic Cataract)
    सबकैप्सूलर मोतियाबिंद (Subcapsular Cataract)
    कॉर्टिकल मोतियाबिंद (Cortical Cataract)

मोतियाबिंद के कारण (Cataract Causes in Hindi)

मधुमेह (Diabetes) – जो लोग मधुमेह से शिकार होते है, उन्हें मोतियाबिंद होने का खतरा अन्य लोगो की तुलना में अधिक हो जाता है|

पराबैंगनी विकिरण (Ultraviolet radiation) – मोतियाबिंद का जोखिम असुरक्षित रूप से पराबैंगनी विकिरण के सपर्क में आने के कारण बढ़ जाता है, इसीलिए खुद को हमेशा पराबैंगनी विकिरण से बचाकर रखे|

शराब (Alcohol) – अनेक शोधों के अनुसार यह बात सामने आयी है, कि जो लोग शराब का अधिक मात्रा में सेवन करते है, उन्हें मोतियाबिंद होने का खतरा अन्य लोगो की तुलना में अधिक होता है|

कुपोषण (Malnutrition) – शोधों के अनुसार जो लोग कुपोषण का शिकार होते है, उनमे मोतियाबिंद होने का जोख़िम बढ़ जाता है|

धूम्रपान (Smoking) – जो लोग धूम्रपान अधिक करते है, उनके लेंस में जल्दी धुंदलापन आ जाता है, जिसके कारण मोतियाबिंद होने का जोख़िम बढ़ जाता है|

दवाएं (Medicines) – मार्किट में मिलने वाली कुछ प्रकार की दवा भी मोतियाबिंद के जोख़िम को बढ़ा देती है, इसीलिए कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के ना ले|

मोतियाबिंद के लक्षण (Cataract symptoms in Hindi)

1. प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता भी मोतियाबिंद का आम और शुरूआती लक्षण है| प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता के कारण सूर्य की रौशनी को देखने में परेशानी होने लगती है| घर में लगी लाइट्स पहले से अधिक चमकीली नजर आने लगती है| ऐसे लोगो को अक्सर रात के समय ड्राइविंग करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है|

2. मोतियाबिंद का सबसे आम और शुरूआती लक्षण है, धुँधला नजर आना| जैसे जैसे मोतियाबिंद बिगड़ता जाता है, वैसे वैसे रेटिना तक प्रकाश कम पहुंचने लगता है, जिसके कारण धुंधला नजर आने लगता है| धुँधला नजर आने के कारण मोतियाबिंद से ग्रसित लोगो को गाड़ी चलाने और रात के समय अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है|

3. मोतियाबिंद के कारण आपको रंगो को देखने में भी परिवर्तन होने लगता है| मोतियाबिंद की वजह से आपको कई रंग फीके नजर आने लगते है| अक्सर शुरुआत में यह लक्षण आपको नजर नहीं आता, लेकिन धीरे धीरे जब यह समस्या बढ़ जाती है, तब आपको इस लक्षण का आभास होने लगता है|

4. मोतियाबिंद होने पर अक्सर आपके कॉन्टैक्ट लेंस या चश्मे का नंबर बार बार बदलने लगता है| ऐसा इसीलिए होता है, क्योंकि समय के साथ साथ मोतियाबिंद बिगड़ता जाता है, जिसके कारण कॉन्टैक्ट लेंस या चश्मे के नंबर में बदलाव होने लगता है|

5. मोतियाबिंद होने पर कई बार लोगो की पास की नजर में अस्थायी रूप से सुधार होता है, लेकिन इसके साथ ही जैसे जैसे मोतियाबिंद बिगड़ता जाता है, वैसे वैसे पास की नजर फिर से कमजोर हो जाती है|

6. दोहरी दृष्टि को डिप्लोपिया कहते है| इसमें एक आँख से देखने पर सामने रखी वस्तु दो नजर आने लगती है| यह भी मोतियाबिंद के होने के संकेत को दर्शाता है|

मोतियाबिंद से बचाव (Prevention of Cataract in Hindi)

1. असुरक्षित रूप से पराबैंगनी विकिरण के संपर्क में आने के कारण मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ जाता है| ऐसे में अगर आप मोतियाबिंद से बचना चाहते है, तो अपने आप को पराबैंगनी विकिरण के सीधे संपर्क में आने से बचाएं| इसके लिए आप बाहार जाते समय धूप का चश्मा लगाकर जाएँ और अपने मुँह पर कॉटन का कपडा लपेटकर जाएँ|

2. अगर आप चश्मा लगाते है, तो नियमित रूप से अपने आँखों की जाँच कराते रहे| समय समय पर अपने चश्मे की जाँच कराते रहे, जिससे मोतियाबिंद को समय रहते कंट्रोल किया जा सके|

3. हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के कारण भी मोतियाबिंद होने का जोखिम बढ़ जाता है, ऐसे में अगर आपको ये बीमारियां है, तो समय समय पर अपनी जाँच कराते रहे| अपनी सभी दवा सही समय पर ले और डॉक्टर द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करे|

4. अगर आप मोतियाबिंद से बचाव चाहते है, तो शराब, बीड़ी, सिगरेट और गुटका पान मशाला जैसी नशीली चीजों से दुरी बनाये रखे| ये सभी चीजे आपके सेहत के लिए बहुत हानिकारक होती है| इनके सेवन से मोतियाबिंद और अन्य कई खतरनाक बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है|

5. कुपोषण के कारण भी मोतियाबिंद का रोग होता है, इसीलिए इस बीमारी से बचने के लिए आप अपने आहार का विशेष रूप से ध्यान रखे| अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियों और ताजे फलों को शामिल करे| खाना खाने का समय निर्धारित करे और अधिक समय तक भूखे ना रहे|

6. मोतियाबिंद का रोग उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है, अर्थात यह बुढ़ापे का रोग है| अगर आप 50 साल की उम्र पार कर चुके है, तो आपको समय समय पर अपनी आँखों की जाँच कराते रहना चाहिए| आँखों की जाँच कराने से मोतियाबिंद को शुरूआती स्टेज पर ही पकड़ लिया जायेगा, जिससे इसके इलाज में आसानी होगी|

मोतियाबिंद का उपचार (Cataract Treatment in Hindi)

दवा – शुरूआती अवस्था में मोतियाबिंद के उपचार के लिए डॉक्टर दवा का सहारा लेते है| दवा के माध्यम से मोतियाबिंद को बढ़ने से रोका जा सकता है| इस बीमारी के उपचार में ड्रॉप का इस्तेमाल किया जाता है| यह ड्रॉप आँखों के लेंस में क्रिस्टलीन प्रोटीन को जमा होने से रोकती है| इससे मोतियाबिंद में भी आराम मिलता है और Lens की पारदर्शिता भी बढ़ती है|

चश्मा – दवा के साथ साथ डॉक्टर मोतियाबिंद का उपचार करने के लिए आपको कांटेक्ट या बाइफोकल लेंस पहनने के लिए भी दे सकते है| ये बाइफोकल या कांटेक्ट लेंस आसानी से मार्किट में उपलब्ध है|

मोतियाबिंद आपरेशन – अगर आपका मोतियाबिंद इतना बिगड़ गया है, कि दवा लेने और चश्मा लगाने के बाद भी आपको कम दिखाई देता है, तो आपको ऑपरेशन कराने की जरुरत पड़ती है| मोतियाबिंद इतना खतरनाक हो सकता है, कि अगर समय पर इसका इलाज शुरू ना किया जाये, तो इसके पककर फूटने की संभावना बढ़ जाती है| जिसके कारण व्यक्ति पूरी तरह अँधा हो सकता है|

ऑपरेशन के बाद मोतियाबिंद से ग्रसित 90 % लोगो की आँखों की रौशनी वापिस आयी है| मोतियाबिंद का ऑपरेशन किसी अच्छी और साफ़ सफाई वाली जगह पर ही कराना चाहिए, क्योंकि संक्रमण के कारण मोतियाबिंद का ऑपरेशन नाकामयाब होने का चांस बढ़ जाता है| मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने में क्या क्या ध्यान रखे या अन्य कोई भी जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ से जानकारी प्राप्त कर ले|

इस पोस्ट में हमने आपको मोतियाबिंद (Motiabind) के बारे में विस्तार से जानकारी दी| आपको हमारी ये जानकारी कैसी लगी, हमें कमेंट करके बताएं| अगर आप मोतियाबिंद (Motiabind) के बारे में कोई अन्य जानकारी चाहते है और किसी अन्य विषय पर हमसे जानकारी प्राप्त करना चाहते है या आपका कोई सवाल है, तो आप इन सभी बातो को हमसे कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है|

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