सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस क्या है | Cervical Spondylosis in Hindi (Symptoms, Types and Treatment)

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस – Symptoms and Treatment of Cervical Spondylosis in Hindi

स्पोंडिलोसिस (Spondylitis) अर्थात स्पॉन्डिलाइटिस मुख्य रूप से हमारे मेरु दंड (Spine) को प्रभावित करता है और यह आर्थराइटिस का ही रूप है| स्पोंडिलोसिस की समस्या वर्टेब की इंटरवर्टेबल डिस्क में बहिःक्षेपण, अपने स्थान से खिसकने और कैल्शियम के डी-जेनरेशन और मेरुदण्ड की हड्डियों के असामान्य रूप से बढ़ने के कारण होती है|

Spondylitis in Hindi

 

स्पॉन्डिलाइटिस के प्रकार (Types of Spondylitis in Hindi)

सरवाइकल स्पोंडिलोसिस (Cervical Spondylosis) – जब स्पॉन्डिलाइटिस के कारण हमारी गर्दन में दर्द होता है, तब इस दर्द को सरवाइकल स्पोंडिलोसिस कहते है| सरवाइकल स्पोंडिलोसिस होने पर गर्दन झुकाने में भी परेशानी होने लगती है| सरवाइकल स्पोंडिलोसिस के कारण गर्दन की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है, जिसके कारण जिसके कारण कई बार दोनों बांहों को हिलाने पर भी दर्द होने लगता है| सरवाइकल स्पोंडिलोसिस का दर्द गर्दन के निचे, एक या दोनों कंधो, क्लैविकल और कंधों के जॉइंट तक भी पहुंच जाता है|

लम्बर स्पोंडिलोसिस (Lumbar Spondylosis) – लम्बर स्पोंडिलोसिस अर्थराइटिस का रूप है| लम्बर स्पोंडिलोसिस मुख्य रूप से हमारी रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) पर असर डालती है| जिसके कारण कमर के नीचे के हिस्से में दर्द की समस्या होने लगती है|

एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस (Ankylosing Spondylosis) – एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस मुख्य रूप से हमारे शरीर के जोड़ो पर असर डालती है| मुख्य रूप से कूल्हों, कंधों और रीढ़ की हड्डी के जोड़ो पर इसका असर पड़ता है| एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस की समस्या होने पर गर्दन, कंधे, घुटने, कूल्हे, एड़ियो, जबड़े और स्पाइन कड़े हो जाते है|

स्पॉन्डिलाइटिस (Spondylitis in Hindi)

स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या अधिकतर 40 की उम्र पार कर चुके लोगो में होती है, लेकिन आजकल की भाग दौड़ भरी जीवनशैली के कारण लोग अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाते, जिसके कारण कम उम्र में ही यह बीमारी लोगो को अपना शिकार बना लेती है| शोधो के अनुसार यह बात सामने आयी है, कि गलत तरीके से बैठकर काम करने या गलत जीवन शैली के कारण यह बीमारी होती है| शरीर में कैल्शियम की कमी इस रोग के होने का दूसरा सबसे बड़ा कारण है|

कई डॉक्टर के अनुसार स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या उन लोगो को ज्यादा परेशान करती है, जो लम्बे समय तक कंप्यूटर पर काम करते है| कंप्यूटर पर काम करते समय अक्सर हम गलत पोजीशन में बैठकरआगे झुककर काम करने लगते है| आकड़ो के अनुसार गलत पोजीशन के कारण आज हर दूसरा व्यक्ति, कमर दर्द, जोड़ो के दर्द, गर्दन दर्द और पीठ दर्द से परेशान है|

स्पोंडिलोसिस के लक्षण (Spondylosis Symptoms in Hindi)

1. पीठ और गर्दन में दर्द स्पोंडिलोसिस का शुरूआती लक्षण है|

2. स्पोंडिलोसिस के कारण होने वाला दर्द समय के साथ साथ बढ़ता जाता है|

3. पैरों के ऊपरी, कमर के निचले और कंधो में कड़ापन आ जाता है और कमजोरी का अनुभव होने लगता है|

4. स्पोंडिलोसिस का दर्द दर्द हाथ की उंगलियों से खोपड़ी तक हो सकता है|

5. शरीर का संतुलन बिगड़ना भी स्पोंडिलोसिस का लक्षण हो सकता है|

6. कशेरुकाओं के बीच की मांसपेशियों में सूजन स्पोंडिलोसिस का संकेत हो सकती है|

7. स्पोंडिलोसिस के कारण कई बार छाती में दर्द होने लगता है|

8. दर्द के साथ साथ स्पोंडिलोसिस में कमजोरी महसूस होने लगती है और सनसनी खत्म हो जाती है|

9. स्पोंडिलोसिस की समस्या गंभीर होने पर उल्टी, थकान, बुखार, भूख में कमी और चक्कर आने जैसे लक्षण भी दिखाई देने लगते है|

10. स्पोंडिलोसिस के कारण उंगलियां सुन्न हो जाती है|

11. स्पोंडिलोसिस के कारण अगर आपके स्पाइनल कोर्ड दब चुके है, तो बाउल या ब्लैडर पर आपका कण्ट्रोल खत्म होने लगता है|

स्पोंडिलोसिस के कारण (Spondylosis Causes in Hindi)

स्पोंडिलोसिस की समस्या अनेक कारणों की वजह से हो सकती है, लेकिन मुख्य रूप से यह समस्या रीढ़ की हड्डी में टूट फुट के Cumulative Effect के कारण से होती है| कई बार स्पोंडिलोसिस आनुवांशिक भी होता है, लेकिन यह अन्य कई कारणों से भी हो सकता है| स्पोंडिलोसिस होने के मुख्य कारण निम्न है –

  • शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी
  • बैठने और खड़े होने का गलत तरीका
  • माहवारी में असंतुलन
  • शारीरिक श्रम की कमी
  • अस्वस्थ वजन (मोटापा)
  • क्षमता से अधिक व्यायाम करना
  • अधिक वजन उठाना
  • हड्डियों में चोट या रोग होना
  • हड्डियों में फ्रैक्चर होना
  • बासी चीजों सेवन
  • अधिक ठंडी और मसालेदार भोजन
  • लॉन्ग ड्राइविंग
  • आनुवंशिक
  • बढ़ती उम्र

स्पोंडिलोसिस के बचाव के उपाय (Prevention of Spondylosis in Hindi)

1. खराब जीवनशैली में सुधार करके इस रोग से काफी हद तक बचा जा सकता है| अपनी जीवनशैली को नियमित बना ले| खाने पीने और सोने जागने जैसे सभी किर्याकलापों का समस्या निर्धारित करे|

2. नियमित रूप से व्यायाम, योग और अन्य फिजिकल एक्टिविटी करने से आप स्पोंडिलोसिस से काफी हद तक बच सकते है|

3. स्पोंडिलोसिस पीड़ित व्यक्ति सिर के नीचे तकिया रखकर ना सोएं और अपने पैरो के बीच में भी तकिया ना रखे|

4. स्पोंडिलोसिस से बचने के लिए खुद को सक्रीय रखे और शारीरिक श्रम करते रहे|

5. बोन मास को मजबूत बनाने के लिए सुबह शाम 20 से 25 मिनट पैदल चलने की आदत डाले|

6. रात को सोने के लिए ऐसे बिस्तर का चुनाव करे, जो ना बहुत अधिक सख्त हो और ना बहुत अधिक मुलायम|

7. स्पोंडिलोसिस से बचने के लिए अपनी डाइट में विटामीन डी और कैल्शियम युक्त ताजे फलो और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करे|

8. कंप्यूटर पर काम करते समय हमेशा सीधे बैठकर काम करे| बैठने के लिए ऐसी कुर्सी का चुनाव करे, जो अच्छा बैक सपोर्ट दे|

9. चलने और बैठने का गलत तरीका इस समस्या का सबसे बड़ा कारण है, इसीलिए इससे बचने के लिए चलने और बैठने का सही तरीका अपनाये| लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में ना बैठे और कंप्यूटर पर काम करते समय आगे की ओर ना झुके|

10. अपने भोजन पर विशेष रूप से ध्यान दे| पोषक तत्वों से युक्त भोजन को अपनी डाइट में शामिल करे|

11. स्पोंडिलोसिस से बचने के लिए कॉफी, चाय कम पियें और शराब, बीड़ी सिगरेट और अन्य नशीली चीजों का सेवन पूरी तरह बंद कर दे|

स्पोंडिलोसिस का घरेलू इलाज (Spondylosis Home Remedies in Hindi)

सर्वाइकल स्पांडलाइसिस की समस्या मुक्त रूप से गर्दन के जोड़ की Bone cartilage घिसने के कारण होती है| अक्सर Bone cartilage बढ़ती उम्र के साथ घिसती है| इसके साथ ही यह समस्या लिगामेंट में फ्रैक्चर होने और गर्दन कीहड्डी के डिस्क के पलटने के कारण भी हो सकती है| ऐसा होने पर व्यक्ति को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है| इसमें कंधे से होते हुए यह दर्द आपकी गर्दन और सिर तक चला जाता है| इसके साथ ही गर्दन में भारीपन और कड़ापन महसूस होने लगता है|

खराब जीवन शैली और बैठने उठने के गलत तरीको के कारण भी यह रोग होता है| शुरूआती अवस्था में स्पोंडिलोसिस का इलाज घरेलू नुस्खों से किया जाना चाहिए| इससे शरीर को नुकसान नहीं होता और रोग पर भी काफी हद तक कण्ट्रोल किया जा सकता है| आइये जाने स्पोंडिलोसिस के इलाज के घरेलू उपाय|

सेंधा नमक – स्पांडलाइसिस के दर्द में आराम पाने के लिए एक बाथ टब में ऊपर तक पानी भर ले और उस टब में सेंधा नमक डालकर 10 से 15 मिनट तक गर्दन के निचे तक के हिस्से को डुबाकर उसमे बैठे| इससे गर्दन का दर्द, अकड़न और कड़ापन दूर हो जायेगा| मैग्नीशियम की अधिक मात्रा होने के कारण सेंधा नमक शरीर के पीएच स्तर को कण्ट्रोल करता है| गर्दन के जिस हिस्से में दर्द हो रहा है, उस हिस्से में सेंधा नमक और पानी को मिलाकर पेस्ट बनाकर लगाएं| ऐसा करने से कुछ ही देर में आपको फर्क नजर आयेगा|

लहसुन – लहसुन में सूजन कम करने वाले और दर्द निवारक गुण मौजूद होते है| स्पांडलाइसिस के दर्द में सुबह खाली पेट कच्चे लहसुन को पानी के साथ खाएं| सरसो के तेल में लहसुन पकाकर कुछ देर बाद तेल को ठंडा करके इस तेल से गर्दन की मालिश करने से स्पांडलाइसिस के दर्द में आराम मिलता है|

नियमित व्यायाम – पांडलाइसिस के दर्द में आराम पाने के लिए नियमित रूप से व्यायाम और योग करे| इस दर्द में गर्दन और बांह का व्यायाम करना लाभकारी है| ये व्यायाम करने से गर्दन और बांह में लचीलापन आता है, जिससे धीरे धीरे दर्द कम हो जाता है| गर्दन की स्पांडलाइसिस में आराम पाने के लिए आप रोजाना 20 से 25 मिनट स्वीमिंग भी कर सकते है|

तिल के बीज – तिल के बीज भी स्पांडलाइसिस के दर्द से निजात दिलाने में सहायक है| तिल के बीजो में मांसपेशियों और हड्डियों की सेहत के लिए जरुरी सभी पोषक तत्व पाएं जाते है| तिल के तेल को गुनगुना करने इस तेल से कुछ देर तक अपनी गर्दन की मालिश करे| मालिश के बाद वहाँ कुछ देर गर्म पानी की पट्टी रखे| ऐसा करने से आपको गर्दन के दर्द में काफी आराम मिलेगा|

स्पांडलाइसिस के दर्द से बचने के टिप्स –

1. कैल्शियम, विटामिन डी और अन्य पोषक तत्वों से युक्त भोजन को अपनी डाइट में शामिल करे|

2. स्पांडलाइसिस होने पर भारी सामना बिलकुल भी ना उठाये|

3. मसालेदार और तली भुनी चीजों से दुरी बनाये रखे|

4. खाना खाने के बाद थोड़ी मात्रा में हरीताकी खाने से गर्दन की अकड़ कम होगी और दर्द से भी छुटकारा मिलेगा|

5. बैठने, खड़े होने और सोने के लिए सही पोजीशन का चुनाव करे|

6. इसके दर्द को कम करने के लिए अधिक से अधिक आराम करे और अच्छी और भरपूर नींद ले|

इस पोस्ट में हमने आपको स्पांडलाइसिस के बारे में विस्तार से जानकारी दी| स्पांडलाइसिस / Spondylitis in Hindi से जुडी हमारी ये जानकारी आपको कैसी लगी और इससे आपको कितना फायदा हुआ, इसके बारे में हमें कमेंट के माध्यम से बताएं| कमेंट करने के लिए पोस्ट के निचे बने कमेंट बॉक्स को फील करे| ऐसे अन्य हेल्थ आर्टिकल पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट रोजाना विजिट करे|

ये भी पढ़े –

पीलिया में क्या खाये
पीलिया का इलाज
पीलिया के लक्षण
बच्चो में पीलिया का इलाज
थायराइड में परहेज
थायराइड में क्या खाये
थायराइड का इलाज

Disclaimer:- All content is good for health but you should take advice from Doctor before using them. We are not responsible for any harm.

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

13 + five =