{मस्तिष्क का दौरा} ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव : Brain Stroke in Hindi

Brain Stroke Symptoms in Hindi – ब्रेन स्ट्रोक के प्रारम्भिक लक्षण

ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्क का दौरा)  एक खतरनाक स्वास्थ्य समस्या है| यह तब होती है, जब किसी कारण से जब मस्तिष्क में मौजूद रक्त वाहिका फट जाती है या फिर मस्तिष्क के किसी भी भाग में रक्तप्रवाह घट जाता या ब्लॉक हो जाता है| ब्रेन स्ट्रोक को मस्तिष्क का दौरा भी कहते है| ब्रेन स्ट्रोक अर्थात मस्तिष्क का दौरा पड़ने पर मस्तिष्क के ऊतकों को पोषक तत्व और जरुरी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिसके कारण कुछ ही देर में मस्तिष्क की कोशिकाएं धीरे धीरे मरने लगती है|

Brain Stroke in Hindi

ऐसा होने पर मस्तिष्क के कुछ हिस्सों को नुकसान होता है और कुछ हिस्से पूरी तरह खराब हो जाते है| ब्रेन स्ट्रोक के कारण मस्तिष्क पूरी तरह खत्म हो सकता है, मनुष्य पुरे जीवन के लिए विकलांग हो सकता है और इसके कारण कई बार व्यक्ति को मौत भी हो सकती है| स्ट्रोक से होने वाले नुकसान से बचने के लिए इसका आपातकालीन उपचार करना जरुरी है| आपातकालीन उपचार की मदद से स्ट्रोक से होने वाली मस्तिष्क हानि को बहुत कम किया जा सकता है|

29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है| चिकित्सा अनुसंधान के बढ़ने के कारण आज ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है और इसका इलाज भी अब संभव हो चूका है| भारत में स्ट्रोक के कारण सबसे अधिक लोगो की मृत्यु होती है और विकलांगता भी स्ट्रोक का ही दुष्परिणाम है| ब्रेन स्ट्रोक के बचाव और इलाज के लिए इसके लक्षणो और कारणों के बारे में विशेष रूप से जानकारी होनी चाहिए|

ब्रेन स्ट्रोक के खतरे की उम्र

खतरनाक और जानलेवा माना जाने वाला ब्रेन स्ट्रोक किसी को भी कभी भी अपना शिकार बना सकता है| ब्रेन स्ट्रोक किसी भी उम्र के व्यक्ति को कभी भी अपना शिकार बना सकता है| जानलेवा मानी जाने वाली इस बीमारी का इलाज अगर समय से करा लिया जाये, तो इससे होने वाली हानि से बचा जा सकता है, लेकिन अगर इस बीमारी का इलाज समय से ना कराया जाये, तो इस बीमारी के परिणाम बहुत बुरे हो सकते है|

ब्रेन स्ट्रोक होने पर मस्तिष्क में खून पहुंचाने का काम करने वाली आर्टरी में क्लोट्स बनने के बाद अपने आप ही ख़त्म होने लगते है| लेकिन इन क्लोट्स को पूरी तरह खत्म करने के लिए हमें इलाज कराना चाहिए| अगर इनके बनने की किर्या को जल्दी ख़त्म ना किया जाये, तो खतरा बहुत बढ़ सकता है|

ब्रेन स्ट्रोक के प्रकार (Types of Brain Stroke in Hindi)

ब्रेन स्ट्रोक के मुख्य तीन प्रकार के होते है| नीचे हमने तीनो के बारे में विस्तार से जानकारी दी है|

रक्तस्रावी स्ट्रोक (Hemorrhagic Stroke) – रक्तस्रावी स्ट्रोक होने पर मस्तिष्क में मौजूद रक्त वाहिकाओ के टूटने से रक्त मस्तिष्क के आस पास के ऊतकों में फैलने लगता है| रक्तस्रावी स्ट्रोक आर्टिरियोवेनस मैलफॉर्मेशन और एन्यूरिज्म दो प्रकार का होता है|

एन्यूरिज्म स्ट्रोक में कमजोर रक्त वाहिकाओ के एक हिस्से में बाहर की ओर सूजन आ जाती है या ये हिस्सा फूल जाता है| कभी कभी यह हिस्सा फट जाता है या पूरी तरह टूट जाता है|

आर्टिरियोवेनस मैलफॉर्मेशन स्ट्रोक में असामान्य रूप से विकसित हुयी रक्त वाहिका टूट जाती है| रक्त वाहिकाएं का टूटना रक्तस्रावी स्ट्रोक का कारण बनता है|

इस्केमिक स्ट्रोक (Ischemic Stroke) – ऐसा माना जाता है, कि 87 % ब्रेन स्ट्रोक इस्केमिक स्ट्रोक होते है| इस्केमिक स्ट्रोक में एक रक्त का थक्का (Blood clot) मष्तिष्क में खून की आपूर्ति और प्रवाह को बांधित या रोकने लगता है| मष्तिष्क में बनने वाला यह रक्त का थक्का अधिकतर एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण बनता है| यह रुधिर-वाहिका के अंदर वसायुक्त और फैट युक्त परतो के बनने से होता है| इन परतो का कुछ हिस्सा ही मष्तिष्क में खून की आपूर्ति और प्रवाह को रोकता है| इस स्थिति में दिल को दौरा भी पड़ सकता है|

इस्केमिक स्ट्रोक थ्रोम्बोटिक और अन्तः शल्य दो प्रकार के होते है| थ्रोम्बोटिक स्ट्रोक में मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओ में खून के थक्के गठित होने लगते है| अन्तः शल्य स्ट्रोक में खून के थक्के मस्तिष्क में शरीर के दूसरे भागो से पहुंचते है| अधिकतर ये थक्के हृदय में होते है| रक्त वाहिकाओ के माध्यम से खून के थक्के हृदय से दिमाग तक पहुंचते है|

क्षणिक इस्कीमिक अटैक (Transient Ischemic Attack) – क्षणिक इस्कीमिक अटैक को मिनिस्टस्ट्रोक या एक प्रकार की चेतावनी माना जाता है| इस अवस्था में ब्लड क्लॉट मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर देती है| इसमें टी आई ए के लक्षण और ब्लड क्लॉट कुछ समय के लिए रहते है|

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण (Brain Stroke Symptoms in Hindi)

ब्रेन स्ट्रोक को आसानी से ठीक किया जा सकता है, अगर इसके लक्षण को सही समय पर पहचान कर इसका तुरंत इलाज करा दिया जाये तो| एक डॉक्टर के अनुसार अगर ब्रेन स्ट्रोक होने के चार घंटे के अंदर इसका इलाज करा लिया जाए तो इससे होने वाली हानि से पूरी तरह बचा जा सकता है| ब्रेन स्ट्रोक के बाद के चार घंटे गोल्डन आवर माने जाते है| इन चार घंटो में इलाज आपको इससे होने वाले नुकसान से पूरी तरह बचा सकता है|

1. उल्टी होना, चक्कर आना और अचानक होने वाला तेज सिर दर्द ब्रेन स्ट्रोक होने का लक्षण है|

2. अचानक चक्कर आना और चलने फिरने में परेशानी होने लगती है|

3. शरीर में कमजोरी आना और एक तरह के हिस्से का पूरी तरह सुन्न हो जाना अर्थात शरीर के एक हिस्से में लकवा हो जाना|

4. ब्रेन स्ट्रोक होने पर एक या दोनों आँखों से धुंधला दिखाई देने लगता है| दोनों आँखों के सामने अँधेरा छाने लगता है और कभी कभी सामने रखी चीजे दो दो नजर आने लगती है|

5. मुस्कुराते समय अगर आपके एक तरह के होठ ना उठे या झूल जाये, तो समझो आपको ब्रेन स्ट्रोक हो चूका है|

6. समझने और बोलने की शक्ति का कम होना| ऐसे में आपको बोलने में कठिनाई होने लगती है या आपको चीजे समझमे नहीं आती|

ब्रेन स्ट्रोक के कारण (Causes of Brain Stroke in Hindi)

ब्रेन स्ट्रोक जिसे मस्तिष्क का दौरा भी कहते है, यह होने के मुख्य दो कारण होते है| इसका पहला कारण है, अरक्तता मस्तिष्क का दौरा और दूसरा कारण है रक्तस्त्राव मस्तिष्क का दौरा| इसके अलावा एक तीसरा ब्रेन स्ट्रोक का कारण भी होता है, इसे क्षणिक इस्केमिक हमला ( Transient Ischemic Attack) कहते है| इस स्ट्रोक के लक्षण कुछ घंटो के लिए ही होते है और उसके बाद यह अपने आप ठीक हो जाता है| इस स्ट्रोक से यह पता चल जाता है, कि आपको कोई शारीरिक परेशानी है| इस स्ट्रोक को चेतावनी की निशानी भी माना जाता है| आइये जाने अन्य दो ब्रेन स्ट्रोक होने के कारणों को विस्तार से|

अरक्तता मस्तिष्क का दौरा (Ischemic Stroke)

80 से 90 % मस्तिष्क के दौरे का कारण यही है| इसे Stroke पड़ने का सामान्य कारण माना जाता है| यह Stroke मस्तिष्क के रक्तवाहिनी के छोटे होने या Block construction के कारण होता है| इस्कीमिक आघात होने के दो कारण होते है|

एम्बोलिक स्ट्रोक (Embolic Stroke) – एम्बोलिक स्ट्रोक में सलाइन, इंजेक्शन या ब्लड क्लॉट द्वारा गलती से रुधिर-वाहिका में मौजूद हवा का छोटा बुलबुला मस्तिष्क की छोटी रक्तवाहिनी में फसने के कारण रक्तवाहिनी में रुकावट पैदा हो जाती है| ऐसे में मस्तिष्क के उस हिस्से को खून ना मिलने पर एम्बोलिक स्ट्रोक आ जाता है|

थ्रोम्बोटिक स्ट्रोक (Thrombotic Stroke) – थ्रोम्बोटिक स्ट्रोक में मस्तिष्क की रक्तवाहिनी क्लॉट के बनने के कारण अवरोध पैदा हो जाता है| जिससे मस्तिष्क के उस हिस्से को खून ना मिलने और खून के अंदर Cholesterol अधिक होने के कारण थ्रोम्बोटिक स्ट्रोक आ जाता है|

रक्तस्त्राव मस्तिष्क का दौरा (Hemorrhagic Stroke)

रक्तस्रावी स्ट्रोक में मस्तिष्क की किसी रक्तवाहिनी में रक्तस्त्राव होने के कारण होता है| ये स्ट्रोक काफी खतरनाक होते है| रक्त वाहिनी में फुलाव और रक्त वाहिनी की जन्मजात विकृति मस्तिष्क में रक्तस्त्राव होने का मुख्य कारण है| रक्तस्रावी स्ट्रोक भी दो प्रकार का होता है|

इंट्राक्रेनियल हेमोरेज (Intracranial Hemorrhage) – इंट्राक्रेनियल हेमोरेज में रक्तवाहिनी में रक्तस्त्राव होता है| रक्तस्त्राव होने के कारण मस्तिष्क के उस हिस्से को रक्त की आपूर्ति नहीं हो पाती| जिसके कारण मस्तिष्क की कोशिकाओ को नुकसान होता है | उच्च रक्तदाब इंट्राक्रेनियल हेमोरेज का मुख्य कारण है| अगर मस्तिष्क की कोशिकाओ को लम्बे समय तक रक्त की आपूर्ति ना मिले, तो इससे कोशिकाएं कड़ी और कमजोर हो जाती है और की बार ये फट या टूट जाती है|

सबाराकनॉइड हैमरेज (Subarachnoid Hemorrhage) – सबाराकनॉइड हैमरेज में कपाल और मस्तिष्क के बीच में रक्तवाहिनी में रक्तस्त्राव होने लगता है| जिसके कारण Subarachnoid space में खून इक्कठा होने लगता है| रक्त वाहिनी में फुलाव और रक्त वाहिनी की जन्मजात विकृति मस्तिष्क में रक्तस्त्राव होने का मुख्य कारण है| रक्तस्रावी स्ट्रोक भी दो प्रकार का होता है|

स्ट्रोक से बचाव के उपाय (How to Prevent a Stroke in Hindi)

1. शराब, गुटका, सिगरेट और बीड़ी जैसी नशीली चीजे स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देती है| अगर आप स्ट्रोक से बचना चाहते है, तो इन सभी चीजों का सेवन पूरी तरह बंद कर दे|

2. मोटापा स्ट्रोक सहित अन्य कई बीमारियों का कारण है, इसीलिए अपने वजन को हमेशा कण्ट्रोल में रखे|

3. स्ट्रोक या किसी भी अन्य बीमारी का कारण है, असंतुलित आहार, ऐसे में अगर आप स्ट्रोक से बचना चाहते है और स्वस्थ जीवन जीना चाहते है, तो समतोल आहार ले|

4. 30 साल की उम्र पार होने के बाद स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, इसीलिए 30 की उम्र पार करने के बाद समय समय पर अपनी बॉडी का चेकअप कराते रहे|

5. मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और उच्च LDL Cholesterol के रोगियों को स्ट्रोक होने का खतरा अधिक होता है, इसीलिए अगर आपको इनमे से कोई भी बीमारी है, तो डॉक्टर से समय समय पर अपना चेकअप कराते रहे|

6. योग हर रोग को दूर करता है, इसीलिए रोजाना योगा और प्राणायाम करे|

7. सिर दर्द का बार बार होना स्ट्रोक का कारण हो सकता है, इसीलिए सिर दर्द होने पर बिना पैन किलर लिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे|

ब्रेन स्ट्रोक किन लोगो को हो सकता है

1. उच्च LDL Cholesterol , हृदय रोग, मधुमेह और उचरक्तचाप से पीड़ित लोगो को|

2. जो लोग नियमित रूप से शराब, तम्बाकू और सिगरेट जैसी नशीली चीजों का सेवन करते है|

3. उचरक्तचाप से पीड़ित मरीजों में से 40 से 50 % मरीजों को स्ट्रोक होने का खतरा रहता है|

4. माइग्रेन और Sickle Cell Anemia के रोगियों को ब्रेन स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है|

5. मधुमेह पीड़ित रोगियों में स्ट्रोक का खतरा दो से तीन गुना अधिक होता है|

6. मस्तिष्क का दौरा अनुवांशिक भी होता है, अर्थात अगर आपके परिवार में किसी को यह रोग रहा है, तो आपको इसके होने के चांस बढ़ जाते है|

7. 50 साल की उम्र पार करने के बाद ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ जाता है|

8. जो लोग हमेशा तनाव में रहते है, उनमे यह रोग होने का खतरा बढ़ जाता है|

9. बहुत अधिक वजन वाले लोगो में|

10. व्यायाम ना करने वाले और हमेशा सुस्त रहने वाले लोगो में|

इस पोस्ट में हमने आपको ब्रेन स्ट्रोक / मस्तिष्क का दौरा के लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के बारे में बताया| आपको हमारी ये पोस्ट कैसी लगी, हमें कमेंट करके बताये| अगर इस पोस्ट के बारे में आपको हमसे कोई सवाल पूछना है या आप किसी अन्य विषय पर हमसे जानकारी चाहते है, तो उसके बारे में हमें कमेंट के माध्यम से बताये|

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