भगन्दर का होम्योपैथिक इलाज, दवा और घरेलू उपचार : What is Fistula Treatment in Hindi

Bhagandar Disease in Hindi

भगन्दर का इलाज (Fistula Treatment in Hindi) : फिस्टुला / भगन्दर गुदा के आस पास होने वाली खतरनाक बीमारी है| फिस्टुला के शुरूआती लक्षण मल द्वार से खून निकलना, गुदा के आस पास छोटे छोटे फोड़े होना और फिर उस फोड़े से खून और मवाद का निकलना आदि है| फिस्टुला / भगन्दर बीमारी बहुत तकलीफ देने वाली होती है, कुछ लोग इस के कारण होने वाले दर्द को सहन भी नहीं कर पाते|

Bhagandar Fistula in Hindi

 

फिस्टुला का हिंदी मीनिंग (What is Fistula Meaning in Hindi)

नॉन वेज और अधिक तेल मशाले वाला भोजन करने से गुदा के आस पास के फोड़े में जल्दी सूजन आ जायेगी और जल्दी ही इन फोड़ो से मवाद निकलने लगेगी| इस बीमारी के अगर समय पर इलाज ना कराया जाये, तो ये बीमारी भयंकर रूप ले लेती है| बिना इलाज के ये बीमारी ठीक नहीं होती और विकराल रूप लेती जाती है|

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भगन्दर के कारण (What is Fistula Causes in Hindi)

  • लम्बे समय तक कब्ज रहना
  • गुदा मार्ग में घाव होना
  • गुदा मार्ग के आस पास खुजली होना
  • अधिक समय तक ठन्डे स्थान पर बैठना
  • गुदा में रक्तप्रवाह का कम होना
  • बैक्टीरियल इन्फेक्शन होना
  • अनोरेक्टल कैंसर होना
  • गुदा मार्ग की सफाई ना करना
  • गुदा मार्ग में निकलने वाली फुंसी या फोड़े का इलाज ना करना
  • गुदा मार्ग में चोट लगना

भगन्दर के लक्षण (Fistula Symptoms in Hindi)

  • गुदा के आस पास बार बार फोड़ा होना
  • मल त्याग के समय तेज दर्द का अनुभव
  • फोड़े से मवाद निकलना
  • सीढ़ियां चढ़ने और उतरने में दिक्कत होना
  • संक्रमण के कारण ठण्ड लगने के साथ साथ बुखार होना
  • मलद्वार से दुर्गंधयुक्त और खुनी स्राव निकलना
  • मलद्वार के आस पास के हिस्से में जलन होना
  • बैठने और लेटने में तकलीफ होना
  • अतिसार और कब्ज की समस्या बने रहना
  • मलद्वार से खून बहना
  • हमेशा शारीरिक थकान रहना
  • मलद्वार के आस पास सूजन होना
  • मलद्वार के आस पास के हिस्से में दर्द होना

भगन्दर का इलाज (Fistula Treatment in Hindi)

1. भगंदर अर्थात फिस्टुला का इलाज सर्जरी के माध्यम से किया जा सकता है| भगंदर की सर्जरी परंपरागत की जाती है और इस सर्जरी का नाम फिस्टुलेक्टमी है| इस सर्जरी के बाद रोगी को डॉक्टर द्वारा दिए गए परामर्श पर पूरा ध्यान देना होगा| फिस्टुलेक्टमी सर्जरी के माध्यम से अंदर से लेकर बाहर तक की पूरी फिस्टुला को निकाल दिया जाता है| अधिकतर इस सर्जरी के दौरान टाँके नहीं लगाए जाते, लेकिन इसके बाद भी रोगी को अपना पूरा ध्यान रखना चाहिए|

2. इस विधि से इलाज करने पर रोगी को बहुत दर्द होता है और कई बार उपचार की यह विधि असफल भी हो जाती है| सर्जरी के बाद फिस्टुला के अंदुरुनी हिस्से और बगल के टाँके कई बार हट जाते है, जिसके कारण दोबारा फिस्टुला होने की संभावना हो जाती है| उपचार के बाद कई दिनों तक रोगी को मल त्याग करते समय कठनाई होती है|

3. फिस्टुला की सर्जरी के जख्म को ठीक होने में दो से तीन महीने तक का समय लग जाता है| इस समय आपको अपना पूरी तरीके से ध्यान रखना होता है| इस समय डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन करे और अपने आहार में पौष्टिक आहार को शामिल करे|

भगन्दर का घरेलू इलाज (Fistula Ka Gharelu Ilaj)

1. नीम की पत्तियों को पेस्ट में, देशी घी, कुटे तिल, 20 ग्राम जौ का आटा और पानी मिलाकर पेस्ट बना ले| अब पेस्ट को कपडे में फैलाकर भगन्दर पर बांध दे| इससे भगन्दर रोग में बहुत आराम मिलता है| भगन्दर की विकृति नष्ट करने के लिए भगन्दर पर नीम की पत्तियों का लेप करे|

2. सूजनयुक्त भगन्दर में लाभ पाने के लिए गिलोय, चित्रक मूल, भारंगी, देवदार, सोंठ, पुनर्नवा, हरड़, हल्दी और दारुहल्दी का काढ़ा बनाकर पियें| पुनर्नवा में भरपूर मात्रा में शोथ-शमन कारी गुण पाए जाते है, जिसके कारण यह भगन्दर के इलाज में अहम भूमिका निभाता है|

3. सेंधानमक और शहद को मिलाकर नासूर पर रखने से भगन्दर रोग पूरी तरह ठीक हो जाता है| सेंधानमक और शहद दोनों ही मार्किट में आसानी से मिल जाते है|

4. गन्दा बिरोजा, नीलाथोथा, पुराना गुड़ और सिरस को पानी के साथ पीसकर बारीक़ लेप बना ले| अब इस लेप को किसी कपडे की सहायता से भगन्दर के घाव पर रखे| ऐसा रोजाना करने से कुछ दिनों में ही भगन्दर का घाव ठीक हो जायेगा| नए गुड़ को इस्तेमाल करने के लिए उसे थोड़ी देर धुप में सूखा ले, इससे उसमे पुराने गुण वाले गुण आ जाते है|

5. पके केले को बीच में से चीरकर इसमें एक चुटकी कपूर पाउडर डालकर खाने से फिस्टुला रोग में आराम मिलता है| ध्यान रहे केला खाने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद कुछ ना खाये|

6. मिस्री और चोपचीनी को बराबर मात्रा में पीसकर देशी घी में मिला ले| अब इस मिश्रण से 20 ग्राम के छोटे छोटे लड्डू बना ले और इस लड्डू का सुबह शाम सेवन करे| ध्यान रहे इन लड्डू का सेवन करते समय खटाई, तेल, नमक और मशालेदार चीजों का सेवन ना करे| एक महीने तक सुबह शाम ये लड्डू खाने से पुराने से पुराना भगन्दर रोग ठीक हो जायेगा|

भगन्दर का आयुर्वेदिक इलाज (Fistula Treatment in Ayurveda in Hindi)

1. भगन्दर को ठीक करने के लिए भगन्दर के नासूर पर तिल का तेल और नीम का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर लगाए|

2. भगन्दर का घाव ठीक करने के लिए रोजाना भगन्दर को पानी मिले डिटॉल से धोये और उसके बाद भगन्दर पर नीम की निमौली का पेस्ट बनाकर लगा ले|

3. भगन्दर के अंदर और नासूर पर रुई को गूलर के दूध में भिगोकर रखने से भगन्दर और नासूर दोनों समस्या कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है| ध्यान रहे रुई के फोहे को रोजाना बदलते रहे|

4. भगन्दर रोग को ठीक करने के लिए सहजन के काढ़े में हींग और सेंधानमक मिलाकर इसका कुछ दिनों तक रोजाना सेवन करे| सहजन के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से भी इस रोग में आराम मिलता है|

5. भगन्दर को ठीक करने और भगन्दर के जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए पानी में त्रिफला पाउडर मिलाकर उबाले और इस पानी को छानकर इस पानी से भगन्दर को धोएं|

भगन्दर का होम्योपैथिक इलाज (Fistula Treatment in Homeopathy in Hindi)

सल्फर 30, 200 – भगन्दर होने पर जब मलद्वार में सूजन आ जाये, या मल त्याग करते समय या त्याग करने के बाद उस स्थान पर दर्द हो तब इस होम्योपैथिक दवा का सेवन करे| इस दवा का सेवन से भगन्दर ठीक हो जायेगा|

साइलीशिया 200, 1M – भगन्दर के इलाज में इस होम्योपैथिक दवा का इस्तेमाल तब करना चाहिए, जब चलने फिरने या मल त्यागने में दर्द होने लगे, मलद्वार के पास के फोड़े से तीव्र गंध वाली मवाद निकलने लगे| इस दवा के सेवन से भगन्दर के सभी लक्षणों को दूर किया जा सकता है|

हिपर सल्फर 6, 30 – हिपर सल्फर 6, 30 का सेवन तब करना चाहिए जब भगन्दर के रोगी को बहुत तेज दर्द का सामना करना पड़े| इस दवा के नियमित सेवन से कुछ दिनों में ही मरीज को बहुत आराम मिलेगा| इस दवा के सेवन से फोड़े से मवाद निकलते समय मरीज को दर्द नहीं होता|

माइरिस्टिका 3x – हिपर सल्फर 6, 30 होम्योपैथिक दवा खाने के बाद भी अगर आपका दर्द कम नहीं हुआ, तब आप इस होम्योपैथिक दवा का सेवन करे| इस दवा के सेवन से कुछ ही दिनों में रोगी को इसका परिणाम देखने को मिलेगा|

भगंदर में परहेज (Bhagandar Ka Parhej)

  • तेल और घी का सेवन ना करे
  • मिर्च मशालेदार पदार्थो का सेवन ना करे
  • लम्बी यात्रा करने से बचे
  • गंदे पानी से ना नहाये
  • लम्बे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम ना करे
  • बाहर का खाना बिलकुल भी ना खाये
  • शरीर की साफ सफाई पर ध्यान दे
  • दर्द निरोधक दवा के सेवन से बचे
  • रात को जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत डाले

भगंदर में क्या खाये (Bhagandar Diet Chart in Hindi)

  • अंकुरित गेहूं और चने का सेवन करे
  • नाश्ते में डोसा और बेसन का चीला खा सकते है|
  • दलिया, खिचड़ी और मलाई रहित दूध का सेवन करे|
  • गाजर, मूली और टमाटर को सलाद में खाये|
  • ताजे और मौसमी फलो का सेवन करे|

इस पोस्ट में हमने आपको भगंदर/ Fistula in Hindi के बारे में पूरी जानकारी दी| भगंदर का इलाज, लक्षण और कारण के बारे में मिली, ये जानकारी आपको कैसी लगी, हमें कमेंट करके बताये| कमेंट करने के लिए पोस्ट के निचे बने कमेंट बॉक्स को फील करे| अगर इस पोस्ट के बारे में आप हमसे कोई सवाल करना चाहते है, या किसी अन्य विषय पर हमसे जानकारी चाहते है, तब भी हमें कमेंट कर सकते है|

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